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April 24, 2018

आखिर क्यों विफल रहा स्किल इंडिया अर्थात कौशल विकास अभियान


कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री के तौर पर राजीव प्रताप रुडी का इस्तीफा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार में कई लोगों के लिए अचरज की बात नहीं है। भाजपा में कुछ लोगों का मानना है कि वास्तव में बिहार के सारण संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित इस सांसद को नवंबर 2014 में यह जिम्मेदारी एक साल बाद होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दी गई थी। कौशल विकास मंत्रालय में रुडी का पहला काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख योजना- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई)- को जुलाई 2015 में शुरू करने के लिए जमीन तैयार करना था। सरकार ने रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) कार्यक्रम के तहत 14 लाख नए प्रशिक्षु सहित 24 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

आरंभिक रुझान

विभिन्न क्षेत्र में कौशल परिषदों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए कौशल विकास मंत्रालय द्वारा गठित शारदा प्रसाद समिति के अनुसार, इस योजना के तहत प्रशिक्षुओं को 5,000 रुपये से 12,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता था। इसलिए सरकार ने राष्टï्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) के जरिये 18 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने और 12 लाख अतिरिक्त को मान्यता देने का लक्ष्य रखा था।

अगले वर्ष पीएमकेवीवाई 2.0 यानी इस योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की गई जिसके तहत 2020 तक 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 12,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया। उन 1 लाख युवाओं में से 60 हजार युवाओं को नए सिरे से प्रशिक्षण देना था जबकि 40 लाख युवाओं को आरपीएल कार्यक्रम के तहत पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस प्रकार की महत्त्वाकांक्षी योजना को शुरू करने से पहले परिणाम का आकलन करने और रोजगार मुहैया कराने एवं उद्योग की कौशल जरूरतों को पूरा करने के दोहरे उद्देश्य की सफलता का पता लगाने के लिए पीएमकेवीवाई 2015 (योजना के पहले चरण) का कोई आकलन नहीं किया गया।’ समिति ने विभिन्न हितधारकों के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए कहा है कि उन सभी ने एक सुर में कहा कि उन्हें जो लक्ष्य दिया गया है वह काफी ऊंचा है और उसका संबंध किसी खास क्षेत्र की जरूरत से नहीं है।

समिति ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के बजाय हर कोई रोजगार मुहैया कराने के अपने आंकड़े जुटाने में लग गए। आंकड़ों से पता चलता है कि एनएसडीसी ने अपने साझेदारों के जरिये 1 सितंबर 2017 तक महज करीब 6 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया और उनमें से महज 72,858 प्रशिक्षित युवाओं को ही रोजगार उपलब्ध कराया गया। इस प्रकार प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार मुहैया कराने की दर करीब 12 फीसदी रही। पीएमकेवीवाई के पहले चरण के तहत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दर करीब 18 फीसदी थी।

वास्तविक गलती

आलोचकों का कहना है कि पीएमकेवीवाई के तहत व्यापक तौर पर लघु अवधि के कौशल प्राठ्यक्रमों का संचालन किया गया और इसलिए प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दर कम रही। भारत में केपीएमजी के पार्टनर एवं प्रमुख (शिक्षा एवं कौशल विकास) नारायण रामास्वामी ने कहा कि लघु अवधि के कौशल प्रदान करने के लिए पीएमकेवीवाई एक महत्त्वाकांक्षी योजना थी। उन्होंने कहा, ‘लेकिन इस योजना पर काफी अधिक जोर दिया गया और इसलिए इसे कौशल संबंधी सभी समस्याओं के हल के तौर पर देखा गया। हमें व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। स्किल इंडिया कार्यक्रम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हमें लघु अवधि के साथ-साथ लंबी अवधि के प्रशिक्षण प्राठ्यक्रमों के लिए परिभाषित दृष्टिïकोण अपनाने की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा कि कौशल विकास एवं उद्यमशीलता द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम पर गौर करने की जरूरत है।

अधिकारियों ने कहा कि सरकार आगामी लोकसभा चुनाव में पीएमकेवीवाई की सफलता को भुनाना चाहती है लेकिन उसकी सुस्त रफ्तार के लिए केवल रुडी को जिम्मेदार माना जा रहा है। एक सूत्र ने कहा, ‘वह नवगठित मंत्रालय के पहले मंत्री थे। उन्हें काफी बोझ विरासत में मिला और इसलिए वह अपनी टीम तैयार नहीं कर सके।’ इस मामले से अवगत लोगों ने बताया कि रुडी एनएसडीसी के प्रदर्शन को लेकर चिंतित थे जिसकी स्थापना कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के तहत सीमित दायित्व कंपनी के तौर पर 2008 में की गई थी। एनएसडीसी का मुख्य उद्देश्य 2022 तक 15 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करना था। हाल की मीडिया खबरोंं से पता चलता है कि सरकार अब परियोजना कार्यान्वयन की शक्तियां एनएसडीसी से अपने हाथों में लेने पर विचार कर रही है।

कमजोर ट्रैक रिकॉर्ड

हालांकि यह कोई पहली एनएसडीसी को संकट का सामना करना पड़ा है। 13 नवंबर 2015 को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने एनएसडीसी और  राष्ट्रीय कौशल विकास फंड के डिजाइन एवं परिचालन पर नए सिरे से गौर करने की सिफारिश की थी। सीएजी की रिपोर्ट एनएसडीसी के प्रदर्शन के विभिन्न पहलुओं एवं तमाम अनियमितताओं पर आधारित थी। रिपोर्ट में कहा गया था, ‘एनएसडीसी अपने साझेदारों को तय प्रशिक्षण लक्ष्य हासिल करने के लिए वित्तीय सहायता मुहैया कराता है। ऐसा पाया गया कि 2010-11 से लेकर 2013-14 के दौरान प्रशिक्षण लक्ष्य हासिल न कर पाने वाले साझेदारों का प्रतिशत क्रमश: 57, 77, 83 और 68 फीसदी रहा। इनमेंं से अधिकतर साझेदार लोगों को प्रशिक्षित करने के अपने लक्ष्य तक तक नहीं पहुंच पाए।’

Note: Write-up above is based on Sahil Makkad’s article in Business Standard.

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