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April 21, 2018

कौशल विकास प्रशिक्षण में घोटाले की दोबारा होगी जांच


रामपुर : कौशल विकास मिशन में अफसरों ने एनजीओ की मिलीभगत से करोड़ों का घपला कर दिया। जिले में करीब एक दर्जन से अधिक एनजीओ ने प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2015-16 में डूडा और मिशन के अधिकारियों ने एनजीओ से साठगांठ करके फर्जी सत्यापन कर विभाग द्वारा मानक के विपरित करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया। लाभार्थियों के चयन में भी धांधली की गई। इसकी शिकायत पूर्व सिपाही ने शासन से की थी।

शासन के निर्देश पर जांच हुई, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने जांच के नाम पर खानापूर्ति कर दी। इस पर पूर्व सिपाही ने जांच पर आपत्ति लगा दी। उनकी आपत्ति पर शासन ने अब दोबारा जांच के लिए मंडलायुक्त को आदेश दिया है। कौशल विकास मिशन के नाम पर बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने के लिए एनजीओ का चयन किया गया था। योजना का मकसद गरीब बेरोजगार युवक-युवतियों को कंप्यूटर, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, होटल मैनेजमेंट जैसे कोर्स कराकर रोजगार से जोड़ना है। इसकी जिम्मेदारी डूडा और राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को दी गई। आरोप है कि वर्ष 2015-16 में डूडा और मिशन के अधिकारियों ने एनजीओ से साठगांठ करके फर्जी सत्यापन कर विभाग द्वारा मानक के विपरित करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया। लाभार्थियों के चयन में भी धांधली की गई। एक लाभार्थी का नाम कई कई ट्रेड में शामिल कर दिया, जबकि शासनादेश के मुताबिक लाभार्थी एक बार में एक ही ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। शासनादेश यह भी है कि लाभार्थियों के 50 फीसद प्लेसमेंट हो जाने के बाद एनजीओ को आधा भुगतान किया जाए, लेकिन डूडा के अधिकारियों और मिशन प्रबंधकों ने फर्जी प्लेसमेंट के कागज लगाकर भुगतान कर दिया। इसकी शिकायत मुहल्ला घेर जानस खां निवासी पूर्व सिपाही मुहम्मद रफी ने सीएम के पोर्टल पर की, जिसपर सीएम कार्यालय ने मंडलायुक्त को जांच करने के लिए पत्र लिखा। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी रामपुर को जांच के आदेश दिए, लेकिन जिलाधिकारी ने विभाग के ही परियोजना अधिकारी डूडा नरेंद्र कुमार सिंह से कराई, लेकिन जांच में सिर्फ खानापूर्ति की गई और शिकायतकर्ता के बिना बयान लिए ही मामला निपटा दिया। पूर्व सिपाही ने इसपर आपत्ति लगा दी, जिसपर सीएम कार्यालय ने दोबारा मंडलायुक्त को 15 दिन में आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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