The poem titled “AI – अभिशाप या वरदान” (AI – Boon or Curse), written by Ms. Anu Gupta, follows a poetic exploration of the fine line between human and AI delving into whether AI is our greatest creation or our ultimate undoing. Beyond the debate of boon or bane, this poem underscores the vital necessity of mastering AI skills to thrive in an evolving digital landscape
AI की धूम मची चारों ओर
क्या है AI, क्यों इतना शोर
चिंता सता रही रात और भोर
लगे यह नवीनता कुछ कठोर
मैं युवा विद्यार्थी मुझे कोई बताओ
क्या बदलेगा इससे मुझे समझाओ
कोई कहे सब नौकरी चली जायेंगीं
आदमी का काम मशीन कर पायेंगीं
पढ़ाई में अब नहीं लग रहा ध्यान
युवाओं को AI कर रहा परेशान
आने वाली पीढ़ी को क्या मिलेगा काम
भ्रम और भय से निकल रही जान
मेरे हुनर कौशल का क्या होगा
या केवल AI का बोलबाला होगा
AI वरदान है या कोई गहरा विष
बनाये या बिगाड़े युवा का भविष्य
आज के आधुनिक युग में
AI आवश्यक सब के लिए
उन्नती का माध्यम बना AI
हर एक नागरिक के लिए
AI बनेगा सब का पार्टनर
निर्णय लेने में हो सहायक
इसको सीखें-सिखाएँ
AI से बने सक्षम और लायक
यदि AI का करें सही उपयोग
मानव प्रतिभा और बढ़े-बढ़ाये
शिक्षा और हुनर का देगा साथ
विकास और प्रगति की ओर ले जाये
हर युवा ले अवश्य AI का ज्ञान
इससे मिले हुनर को नई पहचान
यह तकनीक मिले सब को समान
AI बन जाए कामयाबी की कमान
AI आय बढ़ाने के रास्ते खोले
नए आजीविका अवसरों की खान
भारत का हर युवक बने सशक्त
AI के साथ भरे लंबी-ऊंची उड़ान
Anu Gupta | Social Impact Consultant & Poet

