The poem, written by Ms. Anu Gupta, follows a young woman’s narrative on the vital role of skill development, illustrating how a woman’s expertise can drive the long-term prosperity of her family:
शाहजहांपुर में हुआ जन्म
तीसरी बेटी थी आती माँ को शर्म
मुश्किल से दसवीं करवायी
सोलह होते ही शादी करायी
पति करते दर्जी का काम
कपड़े सिलते सुबह और शाम
लग जाओ काम में मेरे संग
पर सिलाई में नहीं था मन
मैं कुछ अपना करना चाहती
सास को यह बात नहीं सुहाती
फिर पति की नौकरी लगी दिल्ली
मेरे तपते मन मानो मिल गयी सिल्ली
पड़ोसी का पार्लर का काम देखा करते
सींख लूँ मैंने पूछ लिया पति से डरते डरते
थोड़ी आनाकानी की पर मान गये
अब लगा मेरे अच्छे दिन आ गए
मेहनत से किया ब्यूटी का कोर्स
आमदानी भी होने लगी कुछ रोज
हल्के हल्के मैंने काम बढ़ाया
हुनर शिक्षा ने रंग दिखलाया
आत्मसम्मान का हुआ अनुभव
पैसा और स्वाभिमान दोनों हुए सम्भव
आत्मविश्वास से धीरे-धीरे बढ़ाए कदम
ल़डकियों होती बोझ, नष्ट किया भ्रम
सुनो सभी माँ-बाप दो इस बात पर ध्यान
हर लड़की को दो हुनर शिक्षा का ज्ञान
बेटियों को सशक्तिकरण पथ दिखलाओ
सभी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाओ
जिस घर की बेटियाँ हो कौशल योग्य
परिवार करे तरक्की और सुख का भोग
बेटियाँ की क्षमता पर जो करे नाज़,
देश की प्रगति और विकास का राज़
अनु गुप्ता, सामाजिक प्रभाव सलाहकार
(Anu Gupta, Social Impact Consultant)
Women Skill Development

